"And somewhere there are engineers
Helping others fly faster than sound.
But, where are the engineers
Helping those who must live on the ground?"

   --   Young Oxfam Poster


Dharwad Sukhi Jeevan Group

invites you to 
a Workshop on Jeevan Vidya
Facilitated by Vinish Gupta 
from September 29 to October 6, 2018
 at Dharwad, Karnataka

About the workshop:
A Jeevan Vidya workshop is an intensive 40-hour learning experience that seeks to bring one’s attention to neglected and subtle facets of life; issues related to interpersonal relations, education, society, environment, aspirations, success are discussed and participants are provided critical tools to help them explore the rich web of connections between seemingly disparate aspects of life. It is a process of guided introspection, of 'doing philosophy' rather than studying it. There is no sermonizing; the facilitator presents sets of proposals, and helps participants bring their attention to bear on the inner workings of their thoughts, fears and aspirations. Gradually one begins to interrogate hidden assumptions and get a sharper, clearer view of the whole intricate fabric of life; one begins to see new possibilities for positive human action. The idea is to trigger an empowering, self-critical inner dialogue that begins with the workshop, but doesn’t end with it…

This is a residential workshop hosted at Dharwad, Karnataka. There is only room for about 30 participants, so please register as early as possible. It is important that you attend the whole workshop from start to finish as each day builds on the previous one.

The Facilitator:
This workshop will be facilitated by Vinish Gupta, who leads the Centre for Holistic Learning. He has been involved with various social and environmental movements in the past. In his youth he spent over a decade as a Buddhist monk, exploring traditional Indian systems of thought and living. His current interests include value education, and design of environmentally sound systems and technologies.

What to bring:
Bring personal clothing, a bed-sheet, umbrella, torch, water bottle, towel, toiletries, mosquito-net/repellent, and any interesting materials from your organization to share and anything creative that you like to do to share with others.

This event is run on gift culture. The workshop is shared as a gift and the facilitator does not receive any payment for facilitation. Participants come forward to contribute what they can (towards the cost of organising the workshop which is approximately Rs.4000 per person for food and stay); any larger contribution helps support other people's participation. No one is refused due to money constraints.

यह कार्यशाला हिंदी में होगी . (This workshop will be conducted in Hindi).

The arrangements for the boarding and lodging of participants at the venue will be simple and ashram-like. Sleeping arrangements will be on the floor (on mattresses), and the toilets are only Indian-style (there is no western WC at the venue).
Participants will also have opportunity to participate in cooking, farming and maintenance activities on the campus.

To register for the workshop, please fill in the online form.

Participants from Dharwad may contact any of the following to participate:

1. Dr Sanjeev Kulkarni - 9448143100 (7 pm to 9 pm only)
2. Shri Santosh Oswal - 9880139840
3. Shri Sanjeevkumar Patil - 9448231960 (Email: info@tarangscientificinstruments.com )
4. Smt Geeta Suresh - 9483757682
Please note that the workshop is of an integrated nature and has to be attended in its entirety. It may not be attended partially.
Here is how to reach Dharwad. It is ideal for participants to arrive by the evening of the 28th September itself; they may leave after lunch of 6th October 2018.
If you intend to travel by train, please note that train bookings now open 4 months in advance of the travel date, so we advise you not to delay making the necessary bookings!

Best wishes,
Dharwad Sukhi Jeevan Group

धारवाड़ सुखी जीवन समूह ,

द्वारा आयोजित   

धारवाड़, कर्णाटक


जीवन विद्या शिविर

29 सितम्बर से 6 अक्टूबर 2018

शिविर के बारे में:

जीवन विद्या शिविर (करीब 40 घंटे की अवधि की) एक गहरे अध्ययन की प्रक्रिया है, जिसमे जीवन के मौलिक परन्तु प्रायः उपेक्षित पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। आपसी सम्बन्ध, शिक्षा, समाज, प्रकृति, लक्ष्य, सफलता आदि पर एक गहरा संवाद होता है जिसके द्वारा प्रतिभागियों को ज़िन्दगी के भिन्न प्रतीत होने वाले पहलुओं के बीच की कड़ियाँ पहचानने व समझने का अवसर मिलता है। कोई प्रवचन या उपदेश नही होता। प्रबोधक द्वारा कुछ प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाते हैं, और प्रतिभागियों को उनके आतंरिक विचारों, भयों, सम्भ्राँतियों, आकांक्षाओं आदि को जांचने में सहयोग किया जाता है।  क्रमशः ढेर सारी छिपी मान्यताएं उजागर होने लगती हैं और व्यक्ति को ज़िन्दगी के सूक्ष्म ताने बाने का एक नयी स्पष्टता से दर्शन होने लगता है; मानव में सकारात्मक सृजनशक्ति की नयी संभावनाओं का बोध होने लगता है।  एक सशक्त चिंतन-यात्रा का शिविर में प्रारम्भ तो होता है पर अंत नही …

यह 8-दिवसीय पूर्णकालिक आवासीय शिविर है। धारवाड़, कर्णाटक में आयोजित इस शिविर में कुल 30 प्रतिभागियों के लिए स्थान हैं, इस लिए पूर्व पंजीकरण करें।  

शिविर में पूर्णकालिक प्रतिभागिता अनिवार्य है, आंशिक प्रतिभागिता की अनुमति नही है।

शिविर के दौरान स्वैच्छिक श्रमदान करने का व व्यक्तिगत हुनरों के आदान-प्रदान का भी अवसर रहेगा।


इस शिविर में प्रबोधन श्री विनीश गुप्ता करेंगे। वे लम्बे समय से विभिन्न सामाजिक व पर्यावरणीय अभियानों से जुड़े रहे हैं। करीब दस वर्ष तक वे बौद्ध परंपरा में भिक्षु भी रहे, जिस दौरान उन्हें भारतीय विचारधाराओं व तौर तरीकों को समझने का अवसर मिला।

साथ लाएं:

निजी वस्त्र, चादर, पानी की बोतल, टॉर्च, तौलिया, साबुन आदि निजी उपयोग का सामान, आपके संस्था / कार्य से सम्बंधित सामग्री, व कुछ भी रचनात्मक जो आप को दूसरों के साथ करना / बांटना अच्छा लगता है।

यह शिविर ‘उपहार संस्कृति’ पर आधारित है। यानि इस शिविर के लिए कोई निश्चित अनिवार्य शुल्क नही है।  हर प्रतिभागी पर करीब रुपए 4000 का खर्च आता है। प्रबोधक को प्रबोधन कार्य के लिए कोई मानधन नहीं दिया जाता है आप अपनी इच्छा अनुसार योगदान दे सकते हैं।  जो अधिक योगदान का सामर्थ्य रखते हैं उनके योगदान से अन्य लोगों की प्रतिभागिता सुनिश्चित करने में सहयोग रहेगा

आर्थिक असमर्थता के कारण किसी की प्रतिभागिता बाधित नही होने दी जाएगी। 

शिविर स्थली पर रहने वह खाने की व्यवस्थाएं सादी व आश्रम सद्रश होंगी।  सोने की व्यवस्था ज़मीन पर लगे गद्दों पर होगी, व शौचालय केवल भारतीय पद्धति के होंगे। शिविर स्थली पर पाश्चात्य पद्धति के शौचालय (western WC) उपलब्ध नही हैं। शिविरार्थिओं के लिए शिविर स्थली के रख रखाव, भोजन पाचन, श्रमदान आदि में योगदान के भी अवसर उपलब्ध रहेंगे। 

इस शिविर में भाग लेने के लिए यह ऑनलाइन फॉर्म भरें। 

धारवाड़ से प्रतिभागी पंजीकरण हेतु इन से भी संपर्क कर सकते हैं:

1. डॉ. संजीव कुलकर्णी - 9448143100 (सायं 7 से 9 बजे )
2. श्री संतोष ओसवाल - 9880139840
3. श्री संजीवकुमार पाटिल - 9448231960 (इ-मेल : info@tarangscientificinstruments.com )
4. श्रीमति गीता सुरेश - 9483757682

धारवाड़  पहुँचने के बारे में जानकारी यहाँ है। उत्तम होगा यदि प्रतिभागी 28 सितम्बर की शाम तक ही पहुँच पाएं। वे 6 अक्टूबर को दोपहर के भोजन उपरांत वापस लौट सकते हैं।  यदि आप रेल से यात्रा करने वाले हैं तो ध्यान रहे कि टिकटें यात्रा तिथि के 4 महीने पूर्व मिलनी शुरू हो जाती हैं, इस लिए अपनी यात्रा की टिकटें बुक करवाने में विलम्ब न करें !

शुभ कामनाएं

धारवाड़ सुखी जीवन समूह

Some more information about the workshop:
(use your browser's return button to return to this page)